॥ ॐ नमः शिवाय ॥ · Trinetradhar Blessings Trust की पहल

॥ तीर्थों से शिवधाम तक ॥

पवित्र तीर्थ-जल की यात्रा

अनेक तीर्थ • अनेक यात्राएँ • एक पावन स्मृति • एक शिवधाम

॥ शिवक्षेत्र — सर्वतीर्थमय शिव का पावन भाव ॥

संत जिन तीर्थों की यात्रा कर रहे हैं, वहाँ से पावन जल भी

संत जिन पवित्र तीर्थस्थलों की यात्रा कर रहे हैं, वहाँ से मंदिर के लिए श्रद्धापूर्वक पावन जल भी साथ ला रहे हैं। अब तक उत्तरकाशी, हरिद्वार, ऋषिकेश, बद्रीनाथ, मानसरोवर/कैलाश यात्रा, गंगा और मणिमहेश से संबंधित पावन जल मंदिर-संकल्प से जुड़ा है।

इसके अतिरिक्त फक्कड़ बाबा से अनेक तीर्थों में संचित पावन जल का एक अंश प्राप्त हुआ है। उन सभी तीर्थों की पूर्ण प्रमाणित सूची वर्तमान में उपलब्ध नहीं है।

धार्मिक परंपरा

सनातन शैव परंपरा में भगवान शिव को ‘सर्वतीर्थमय’ भाव से स्मरण करने और शिव-संबद्ध क्षेत्र को तीर्थमय मानने की व्यापक धार्मिक भावना मिलती है। जल भारतीय पूजा-परंपरा में शुद्धता, अर्पण और अभिषेक से गहराई से जुड़ा है।

“भारतवर्ष के सभी ज्ञात-अज्ञात तीर्थों का जल” जैसी अभिव्यक्ति को वास्तविक इन्वेंट्री नहीं, बल्कि संत-समागम की भावपूर्ण आध्यात्मिक अभिव्यक्ति के रूप में पढ़ा जाए। शास्त्रीय उद्धरणों के एकदम सही ग्रंथ/अध्याय/श्लोक संदर्भ सत्यापन के बाद ही प्रकाशित होंगे।
पावन जल स्रोतों और पंच कैलाश का सांकेतिक मानचित्र उत्तरकाशी, हरिद्वार, ऋषिकेश, बद्रीनाथ, मानसरोवर / कैलाश यात्रा, मणिमहेश हिमालय कैलाश मानसरोवर आदि कैलाश किन्नौर कैलाश श्रीखंड कैलाश मणिमहेश कैलाश उत्तरकाशी हरिद्वार ऋषिकेश बद्रीनाथ मानसरोवर / कैलाश यात्रा मणिमहेश
पावन जल स्रोत (उपलब्ध विवरण) सत्यापित कैलाश — शिवलिंग प्राप्त कैलाश — आगामी

सांकेतिक चित्र — पैमाने पर नहीं। जिन स्रोतों का स्थान अभिलेखित नहीं, वे मानचित्र पर नहीं — केवल सूची में।

संत-समागम

फक्कड़ बाबा — जल का महा-संगम

एक वस्त्र, न धन का संचय, न मोबाइल का मोह — लेकिन थैले में अनेक तीर्थयात्राओं से संजोया पावन जल। मंदिर के संकल्प के बारे में जानकर उन्होंने सहर्ष उसमें से एक अंश प्रदान किया।

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यात्राएँ अलग थीं। यात्री अलग थे। तीर्थ अनेक थे। लेकिन जल का वह अंश अंततः एक शिव-संकल्प से जुड़ गया।

पावन जल अभिलेख

पावन जल अभिलेख

हर स्रोत का स्थायी पावन जल अभिलेख आई डी — स्रोत, तिथि, यात्रा, संग्राहक/प्रदाता, मूल पात्र/सील, फोटो/वीडियो, विवरण और सत्यापन स्थिति। अभिरक्षा संबंधी विवरण निजी रखे जाते हैं।

इन पवित्र जलों को श्रद्धापूर्वक सुरक्षित एवं अभिलेखित किया जाएगा। भविष्य में पूजा, अभिषेक अथवा प्रतिष्ठा में उपयोग की धार्मिक विधि प्रतिष्ठा-आचार्य एवं संबंधित धार्मिक विद्वानों के मार्गदर्शन से तय होगी।