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संत-समागम

फक्कड़ बाबा — एक अप्रत्याशित संत-समागम

तीर्थयात्राएँ केवल स्थानों से नहीं मिलातीं; कभी-कभी वे ऐसे साधकों से भी मिलाती हैं जिनका जीवन स्वयं एक यात्रा बन चुका होता है।

कौन हैं फक्कड़ बाबा?

यात्रा-क्रम में पूज्य संत का मिलन ‘फक्कड़ बाबा’ से हुआ।

उपलब्ध विवरण के अनुसार फक्कड़ बाबा एक ऐसे विरक्त संत हैं जो जीवन भर निरहंकार और निष्काम भाव से अनेक गुप्त व प्रकट तीर्थों की यात्राएँ करते रहे हैं और प्रायः पैदल यात्रा करते हैं।

एक वस्त्र

उनकी जीवन-सादगी का एक विशिष्ट पक्ष यह बताया गया है कि वे मात्र एक वस्त्र में रहते हैं और उनके सामान के थैले में दूसरा वस्त्र तक नहीं रहता। 

न धन का संचय

उन्हें यदि कोई धनराशि अथवा भेंट अर्पित करता है, तो वे उसे अपने पास संचित न रखकर आगे किसी अन्य को दे देते हैं; उनके बारे में बताया गया है कि वे अपने पास एक रुपया भी संग्रह करके नहीं रखते।

न मोबाइल का मोह

संपर्क हेतु वे मोबाइल तक अपने पास नहीं रखते; यदि कोई मोबाइल उपहार में देता है तो बाद में उसे भी किसी अन्य को भेंट कर देते हैं।

लेकिन साथ था तीर्थ-जल

वे अपने थैले में अपनी अनेक तीर्थयात्राओं से श्रद्धापूर्वक संजोया पावन जल रखते थे। इनमें से कई तीर्थों के नाम आम जन को ज्ञात नहीं हैं और सभी स्रोतों की पूर्ण प्रमाणित सूची वर्तमान में उपलब्ध नहीं है।

जल का महा-संगम

जब फक्कड़ बाबा को श्री पंच कैलाश मंदिर के इस संकल्प से अवगत कराया गया, तो उन्होंने अत्यंत प्रसन्नता और सहर्ष भाव से अपनी अनेक तीर्थयात्राओं से संचित पावन तीर्थ-जल में से मंदिर हेतु पूज्य संत को जल प्रदान किया।

इस प्रसंग का भाव यह है कि श्री पंच कैलाश मंदिर के संकल्प से पाँच कैलाशों के साथ अनेक ज्ञात और अभी पूर्णतः अभिलेखित न हो सके तीर्थों की पावन जल-स्मृतियाँ भी जुड़ रही हैं।

यात्राएँ अलग थीं। यात्री अलग थे। तीर्थ अनेक थे। लेकिन जल का वह अंश अंततः एक शिव-संकल्प से जुड़ गया।