॥ ॐ नमः शिवाय ॥ · Trinetradhar Blessings Trust की पहल

॥ आध्यात्मिक संकल्प — परम संकल्प ॥

आध्यात्मिक संकल्प

पंच कैलाश — पंच चेतना — एक शिव

🌺 परम संकल्प

“पञ्च कैलाश-समागम एवं अखण्ड तीर्थ-चेतना”

सृष्टि के अनादि काल से ही कैलाश पर्वत केवल एक भौगोलिक संरचना नहीं, अपितु शिवभक्तों की श्रद्धा में सम्पूर्ण ब्रह्मांड की सर्वोच्च आध्यात्मिक चेतना, भगवान शिव का साक्षात् स्वरूप और ब्रह्म-ज्ञान की पराकाष्ठा है।

‘पञ्च कैलाश’ — कैलाश मानसरोवर, मणिमहेश कैलाश, आदि कैलाश, किन्नौर कैलाश एवं श्रीखंड कैलाश — को महादेव की पाँचों दिशाओं (सद्योजात, वामदेव, अघोर, तत्पुरुष एवं ईशान) के स्वरूप के रूप में हमारे मंदिर में स्मरण किया गया है।

हमारी आध्यात्मिक व्याख्या

यह सनातन परंपरा में अथवा किसी प्राचीन शास्त्रीय वर्गीकरण का दावा नहीं, बल्कि हमारे मंदिर की अपनी आध्यात्मिक व्याख्या है।

पूज्य संत की शिव-इच्छा और अटूट श्रद्धा की महायात्रा

प्रत्येक शिव-भक्त के जीवन की यह तीव्र उत्कंठा होती है कि वह इन दुर्गम कैलाश शिखरों का दर्शन कर जीवन को कृतार्थ करे, किंतु शारीरिक अक्षमता, दुर्गम मार्ग और समयाभाव के कारण कोटि-कोटि श्रद्धालु इस पुण्य से वंचित रह जाते हैं।

इसी लोक-कल्याणकारी मर्म को हृदयंगम कर, हिमालय की कंदराओं में लीन एक पूज्य संत भगवान विश्वनाथ की प्रेरणा से पाँचों कैलाश से शिवलिंगों को प्राप्त कर एवं वहाँ के पावन जल का समागम कर उन्हें श्री पंच कैलाश मंदिर में प्रतिष्ठित कराने ला रहे हैं।

निःस्वार्थ भाव, केवल शिव-नाम के सम्बल और कठोर तपश्चर्या के साथ पूज्य संत ने इस यात्रा का श्रीगणेश किया — यह भौतिक साधनों की नहीं, शिव-इच्छा और अटूट श्रद्धा की महायात्रा है।

संत की आध्यात्मिक अनुभूति एवं श्रद्धा के रूप में प्रकाशित।

अंतर्मन की कैलाश यात्रा

पंच कैलाश — पंच चेतना — एक शिव

श्री पंच कैलाश मंदिर का संकल्प केवल एक भव्य धार्मिक भवन का निर्माण नहीं है। यह मनुष्य को बाह्य दर्शन से अंतर्दर्शन, आराधना से साधना, साधना से करुणा और करुणा से सेवा की ओर प्रेरित करने का आध्यात्मिक प्रयास है।

आराधना→ आत्मचिंतन→ आत्मशुद्धि→ करुणा→ सेवा→ लोकमंगल

॥ पंच कैलाश — पंच साधना-संकल्प ॥

पंच कैलाश से एक जीवन-संकल्प लेकर जाइए

किसी एक कैलाश को चुनें — और उससे जुड़ा एक छोटा जीवन-संकल्प लें। आपका चयन कहीं संग्रहित नहीं होता।

कैलाश मानसरोवर • शिवतत्त्व

🕉 आज मैं कुछ समय मौन और आत्मचिंतन के लिए दूँगा।

क्या तुम शिवतत्त्व का चिंतन कर सकते हो?

इससे आप केवल जानकारी पढ़कर नहीं जाएँगे — पंच कैलाश से एक जीवन-संकल्प लेकर जाएँगे।

॥ पंच कैलाश से लोकमंगल तक ॥

और यात्रा यहीं समाप्त नहीं होनी चाहिए

यदि शिवतत्त्व का चिंतन हमें शांत करता है, साधना हमें परिष्कृत करती है, श्रद्धा हमें विनम्र करती है, तप हमें दृढ़ करता है और समर्पण हमारे अहंकार को कम करता है — तो उसका प्रभाव हमारे व्यवहार में दिखाई देना चाहिए।

हम अधिक करुणामय बनें। परिवार के प्रति उत्तरदायी बनें। प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनें। पीड़ित के प्रति सहृदय बनें और अपनी सामर्थ्य के अनुसार समाज के काम आएँ — तभी पंच कैलाश की आध्यात्मिक यात्रा मंदिर से निकलकर जीवन में प्रवेश करेगी।

॥ पंच कैलाश प्रार्थना ॥

हे कैलाशपति महादेव!

कैलाश मानसरोवर की अचलता से हमारे चित्त को स्थिरता दीजिए।

आदि कैलाश की साधना से हमारे जीवन को अनुशासन दीजिए।

किन्नौर कैलाश की विराटता से हमारे हृदय में श्रद्धा और विनम्रता जगाइए।

श्रीखंड कैलाश की कठिन यात्रा से हमें तप, धैर्य और संकल्प की प्रेरणा दीजिए।

मणिमहेश की पवित्र शांति से हमें समर्पण का भाव दीजिए।

हमारी भक्ति में अहंकार न हो। हमारे ज्ञान में अभिमान न हो। हमारे तप में कठोरता न हो। हमारे समर्पण में पलायन न हो।

और हमारी आराधना केवल मंदिर तक सीमित न रहे — वह करुणा बनकर हमारे हृदय में, सेवा बनकर हमारे हाथों में, और लोकमंगल बनकर हमारे कर्मों में उतरे।

॥ ॐ नमः शिवाय ॥

मंदिर का सेवा-सूत्र

शिव की आराधना — जीव की सेवा

यह मंदिर का सेवा-सूत्र है, किसी प्राचीन ग्रंथ का शाब्दिक उद्धरण नहीं।

मंदिर में शिव का अभिषेक हो— समाज में प्यासे के लिए जल की संवेदना भी हो।
नैवेद्य अर्पित हो— भूखे के प्रति करुणा भी हो।
कैलाश को प्रणाम हो— धरती, जल और वृक्षों की रक्षा भी की जाए।

कैलाश एवं प्रकृति

कैलाश को प्रणाम — प्रकृति का संरक्षण

हिमालय के प्रति श्रद्धा मंदिर-परिसर की प्रकृति-संवेदनशील व्यवस्था में भी दिखाई दे — यही संकल्प है।

  • बिल्व वाटिका
  • उपयुक्त स्थानीय वृक्षारोपण
  • जल संरक्षण
  • वर्षा-जल संचयन
  • अभिषेक-जल का जिम्मेदार प्रबंधन
  • ऊर्जा संरक्षण
  • स्वच्छ परिसर
  • एक बार इस्तेमाल होने वाला प्लास्टिक में कमी

तीन पवित्र धाराएँ — एक शिवधाम

भावी पीढ़ियों की आध्यात्मिक विरासत

पाँच कैलाशों से — पाँच शिवलिंग। पवित्र तीर्थों से — पावन जल। मुक्तिनाथ–गंडकी से — तीन शालिग्राम। और इन सभी पवित्र यात्राओं की मंजिल — श्री पंच कैलाश मंदिर।

हम केवल आज के लिए मंदिर नहीं बना रहे; हम भविष्य को एक आध्यात्मिक विरासत सौंपने का संकल्प ले रहे हैं।

Digital Heritage Archive →