5. भरमौर, चम्बा, हिमाचल प्रदेश
मणिमहेश कैलाश
समर्पण का अर्थ निष्क्रियता नहीं — सर्वोत्तम प्रयास और अहंकार का विसर्जन।
समर्पण
॥ समर्पण — शिव चरणों में अहंकार का विसर्जन ॥
समर्पण का अर्थ निष्क्रियता नहीं।
तथ्य • धार्मिक परंपरा • हमारी आध्यात्मिक व्याख्या
तथ्य
- मणिमहेश हिमाचल प्रदेश के चम्बा जनपद के भरमौर क्षेत्र की प्रमुख शिव-तीर्थ परंपरा है।
- मणिमहेश कुण्ड (झील) इस तीर्थ-यात्रा का केंद्र है।
धार्मिक परंपरा / मान्यता
- स्थानीय धार्मिक परंपरा मणिमहेश को भगवान शिव से अत्यंत गहराई से जोड़ती है।
- मान्यता है कि सूर्योदय की प्रथम किरण जब इस शिखर पर पड़ती है, तो मणि की भाँति प्रकाश प्रस्फुटित होता है — इसे भगवान शिव के मणिरूप प्रकाश का पावन धाम कहा जाता है।
हमारी आध्यात्मिक व्याख्या
श्री पंच कैलाश मंदिर में मणिमहेश को हमने “समर्पण” के भाव से जोड़ा है। अपना सर्वोत्तम प्रयास करना, धर्मसम्मत कर्म करना और परिणाम को अहंकार का कारण न बनने देना — यही भाव है। यह हमारे मंदिर की आध्यात्मिक व्याख्या है।
समर्पण क्या है?
समर्पण का अर्थ निष्क्रियता नहीं। अपना सर्वोत्तम प्रयास करना, धर्मसम्मत कर्म करना और परिणाम को अहंकार का कारण न बनने देना — यही भाव है।
प्रयास मेरा — परिणाम शिव के चरणों में।
क्या अंततः तुम अपना अहंकार शिवचरणों में समर्पित कर सकते हो?
इस कैलाश से एक जीवन-संकल्प
🕉 मैं अपने कर्म को ईश्वर को अर्पित करते हुए अहंकार कम करने का प्रयास करूँगा।
पंच साधना-संकल्प →संबंधित provenance एवं चित्र
अभिलेख
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