FAQ
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या यह पाँच अलग-अलग मंदिर होंगे?
नहीं। एक मुख्य मंदिर और एक मुख्य सभामंडप में पाँच शिवलिंग प्रतिष्ठित किए जाने का संकल्प है।
क्या पाँचों शिवलिंग प्राप्त हो चुके हैं?
नहीं। मानसरोवर शिवलिंग अगस्त 2026 और मणिमहेश शिवलिंग सितंबर 2026 में प्राप्त हुआ; तीन अध्याय आगामी हैं।
क्या पवित्र तीर्थों का जल भी लाया जा रहा है?
हाँ। उत्तरकाशी, हरिद्वार, ऋषिकेश, बद्रीनाथ, मानसरोवर/कैलाश यात्रा, गंगा और मणिमहेश से संबंधित पावन जल जुड़ा है; फक्कड़ बाबा से अनेक तीर्थों के संचित जल का अंश भी मिला है।
फक्कड़ बाबा के जल के सभी स्रोत कौन से हैं?
पूर्ण प्रमाणित सूची उपलब्ध नहीं; कोई नाम अनुमान से प्रकाशित नहीं होगा।
क्या सभी जल प्राण-प्रतिष्ठा में उपयोग होंगे?
अभी निश्चित दावा नहीं। धार्मिक उपयोग प्रतिष्ठा-आचार्य के मार्गदर्शन से तय होगा।
क्या ‘शिवतत्त्व, साधना, श्रद्धा, तप, समर्पण’ शास्त्रीय पंच-कैलाश वर्गीकरण है?
नहीं। यह मंदिर की अपनी आध्यात्मिक व्याख्या है।
क्या मंदिर में पंचदेवों की भी स्थापना प्रस्तावित है?
हाँ। शिव-प्रधान मंदिर की प्रस्तावित धार्मिक व्यवस्था में भगवान शिव, भगवान गणेश, भगवान सूर्य, भगवान लक्ष्मी-नारायण और माता दुर्गा की पंचदेव प्रतिष्ठा का संकल्प है। पाँचों देव-स्वरूपों की मूर्तियाँ विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा के साथ स्थापित किए जाने का संकल्प है; अंतिम प्रतिष्ठा-विधि एवं विन्यास प्रतिष्ठा-आचार्य/योग्य धार्मिक विद्वान के मार्गदर्शन में निर्धारित होगा।
मुक्तिनाथ से आए तीन शालिग्राम कहाँ से प्राप्त हुए?
पूज्य संत जून 2026 में नेपाल के मुक्तिनाथ धाम की यात्रा पर गए और गंडकी नदी से तीन शालिग्राम श्री पंच कैलाश मंदिर हेतु लेकर आए। इन्हें भगवान लक्ष्मी-नारायण के समीप पूजनार्थ प्रतिष्ठित करने का संकल्प है।
मुख्य संत का नाम क्यों प्रकाशित नहीं है?
मुख्य संत का नाम एवं चित्र उनकी स्पष्ट अनुमति प्राप्त होने तक सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। वेबसाइट पर उनकी यात्रा का वही विवरण प्रकाशित होगा जिसके सार्वजनिक उपयोग की अनुमति हो।
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